मांगलिक दोष में मतभेद कहाँ से आता है?
कुछ मत मंगल को लग्न से देखते हैं, कुछ चंद्र और शुक्र से भी। उत्तर भारतीय सूचियों में प्रायः 1, 4, 7, 8 और 12 भाव आते हैं; दक्षिण भारतीय प्रयोग में दूसरा भाव जुड़ सकता है और पहला हट सकता है। इसलिए एक ही ग्रह-स्थिति पर दो ईमानदार गणनाएँ अलग निष्कर्ष दे सकती हैं।
कैलकुलेटर हर पद्धति का नाम, उसका निष्कर्ष और जहाँ लागू हो वहाँ तीव्रता अलग पंक्ति में दिखाता है। बहुमत को अंतिम सत्य नहीं माना जाता।
सही जन्म समय क्यों जरूरी है?
मांगलिक जांच भावों पर निर्भर है और भाव लग्न से बनते हैं। लग्न लगभग हर दो घंटे में राशि बदल सकता है; सीमा के पास कुछ मिनट भी परिणाम बदल सकते हैं। दोपहर मान लेना या खाली समय को 12 बजे मानना व्यक्तिगत कुंडली नहीं बनाता।
यदि समय केवल परिवार का अनुमान है तो पहले जाँचें कि जन्म समय बदलने पर परिणाम बदलता है या नहीं। अनुमानित जानकारी से निकला साफ “हाँ” या “नहीं” भरोसेमंद नहीं है।
यह कैलकुलेटर क्या दावा नहीं करता
यह विवाह के भविष्य, जीवनसाथी की गुणवत्ता या किसी घटना की भविष्यवाणी नहीं करता। यह केवल स्रोतों में दिए पारंपरिक नियमों की गणना दिखाता है। किसी उपाय की प्रभावशीलता का दावा भी नहीं किया जाता।
आपके जन्म विवरण परिणाम देने के बाद सहेजे नहीं जाते। इससे कोई रिपोर्ट या भुगतान रिकॉर्ड भी नहीं बनता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मांगलिक दोष का एक ही नियम है?
नहीं। भाव-सूची, संदर्भ-बिंदु, भार और अपवाद पर परंपराएँ अलग हैं; इसलिए पद्धति का नाम जरूरी है।
क्या मांगलिक और कुजा दोष अलग हैं?
दोनों मंगल से जुड़ी क्षेत्रीय संज्ञाएँ हैं, लेकिन उनके पीछे इस्तेमाल होने वाली भाव-सूची हर क्षेत्र में एक जैसी नहीं।
यह पेज कहाँ तक जवाब देता है: पद्धतियों, नक्षत्रों और स्रोतों के प्रचलित नाम नहीं बदले गए हैं, ताकि आप उन्हें पहचानकर जाँच सकें। यह पेज पारंपरिक नियम समझाता है; इसके परिणाम को वैज्ञानिक भविष्यवाणी या विवाह का फैसला न मानें।
