36 गुण किन आठ कूटों से बनते हैं?
वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी मिलकर अधिकतम 36 अंक बनाते हैं। हर कूट का भार अलग है; इसलिए एक ही कुल अंक आठ कूटों के दो बिल्कुल अलग संयोजनों से बन सकता है।
कुल संख्या से पहले आठों पंक्तियाँ देखें। नाड़ी के आठ अंक या भकूट के सात अंक बदलना, वर्ण का एक अंक बदलने जैसा नहीं है।
नक्षत्र और पाद पहले से क्यों चाहिए?
यह नक्षत्र-आधारित कैलकुलेटर है। यह नाम या अधूरी तारीख से जन्म नक्षत्र का अनुमान नहीं लगाता। नक्षत्र मालूम न हो तो पहले सही जन्म तारीख, समय और स्थान से नक्षत्र कैलकुलेटर चलाएँ।
वधू और वर का क्रम जानबूझकर अलग रखा गया है, क्योंकि कुछ कूट दिशात्मक गिनती करते हैं। दोनों चयन बदल देने से परिणाम बदल सकता है।
अलग वेबसाइट पर अलग अंक क्यों आते हैं?
ग्रह मैत्री, तारा, गण और भकूट की एक से अधिक प्रकाशित तालिकाएँ मिलती हैं। किसी एक तालिका का नाम बताए बिना उसे “सही” कहना असली मतभेद छिपा देता है। यहाँ मुख्य तालिका के साथ दूसरे विकल्प भी उनके नाम से दिखाए जाते हैं।
यह गणना वैवाहिक अनुकूलता की वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं है। यह पारंपरिक तालिकाओं को पारदर्शी और दोबारा जांचने योग्य रूप में दिखाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुण मिलान के लिए जन्म समय जरूरी है?
यदि दोनों के सही नक्षत्र और पाद पहले से मालूम हैं तो इस कैलकुलेटर में समय नहीं चाहिए। उन्हें निकालने के लिए सही जन्म समय और स्थान चाहिए।
क्या 36 में 36 सबसे अच्छा परिणाम है?
यह तालिका का अधिकतम है, जीवन या विवाह का प्रमाण नहीं। कुछ परंपराएँ अलग परीक्षणों को अधिक महत्व देती हैं।
यह पेज कहाँ तक जवाब देता है: पद्धतियों, नक्षत्रों और स्रोतों के प्रचलित नाम नहीं बदले गए हैं, ताकि आप उन्हें पहचानकर जाँच सकें। यह पेज पारंपरिक नियम समझाता है; इसके परिणाम को वैज्ञानिक भविष्यवाणी या विवाह का फैसला न मानें।
